Vaishnao Khatri , jablpur 

" अभिव्यंजना " काव्य संग्रह गुरुजनों के परम आशीष का प्रतिरूप है,इसमें मेरा कुछ भी नहीं।परमाराध्य माता-पिता की अभिव्यंजना का अभिव्यंजित स्वरूप ही प्रतिबिम्बित है," अभिव्यंजना" काव्य संग्रह।
     अभिव्यंजना को अभिव्यंजित करने में 
 हृदयावस्थित ममानुज सुलक्षित श्री लक्ष्मीकांत शर्मा एवं सुलक्षणा सुलक्षित ललिताभिराम भव्याभिलोकित भाभी परम पावन श्रीमती पवन शर्मा के अंतस् आत्मीय सहयोग की ॠणी, मैंने उनके लिए अपना हृदयांगन असीम आसमान-सा कपट कपाट रहित खुला रखा है। मैं उनके बाल वृन्द सहित सबके मंगलमयता की मंगल कामना  करती हूँ।
        हमारे केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य श्री शिव किशोर पाण्डेय एवं श्री विजय कुमार गर्ग तथा शिक्षक वृन्द और विद्यार्थीगण मेरे सहृद सुहृद  सुसमीक्षक हैं। मैं उनके प्रति आत्मीय कृतज्ञता ज्ञापित करती हूँ। उनकी निरन्तर सद्प्रेरणा के स्वरूप ही मैं " अभिव्यंजना " काव्य संग्रह  का सृजन कर सकी।
        कवि डॉ रवीन्द्र प्रसाद, शिक्षक, संस्थापक अध्यक्ष, साहित्य सृजन मंच,चतरा (झारखण्ड) का अनुपम अनुपमेय अप्रतिम एवं आत्मीय सद्  सहयोग मेरे लिए अद्वितीय दुर्लभ  संयोग सुलभ हुआ  है। हृदयान्तराल से मैं उनका हार्दिक आभार अभिव्यक्त करती हूँ।

 


 

Vaishnao Khatri , jablpur 

" अभिव्यंजना " काव्य संग्रह गुरुजनों के परम आशीष का प्रतिरूप है,इसमें मेरा कुछ भी नहीं।परमाराध्य माता-पिता की अभिव्यंजना का अभिव्यंजित स्वरूप ही प्रतिबिम्बित है," अभिव्यंजना" काव्य संग्रह।
     अभिव्यंजना को अभिव्यंजित करने में 
 हृदयावस्थित ममानुज सुलक्षित श्री लक्ष्मीकांत शर्मा एवं सुलक्षणा सुलक्षित ललिताभिराम भव्याभिलोकित भाभी परम पावन श्रीमती पवन शर्मा के अंतस् आत्मीय सहयोग की ॠणी, मैंने उनके लिए अपना हृदयांगन असीम आसमान-सा कपट कपाट रहित खुला रखा है। मैं उनके बाल वृन्द सहित सबके मंगलमयता की मंगल कामना  करती हूँ।
        हमारे केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य श्री शिव किशोर पाण्डेय एवं श्री विजय कुमार गर्ग तथा शिक्षक वृन्द और विद्यार्थीगण मेरे सहृद सुहृद  सुसमीक्षक हैं। मैं उनके प्रति आत्मीय कृतज्ञता ज्ञापित करती हूँ। उनकी निरन्तर सद्प्रेरणा के स्वरूप ही मैं " अभिव्यंजना " काव्य संग्रह  का सृजन कर सकी।
        कवि डॉ रवीन्द्र प्रसाद, शिक्षक, संस्थापक अध्यक्ष, साहित्य सृजन मंच,चतरा (झारखण्ड) का अनुपम अनुपमेय अप्रतिम एवं आत्मीय सद्  सहयोग मेरे लिए अद्वितीय दुर्लभ  संयोग सुलभ हुआ  है। हृदयान्तराल से मैं उनका हार्दिक आभार अभिव्यक्त करती हूँ।

 


 

Vaishnao Khatri , jablpur 

" अभिव्यंजना " काव्य संग्रह गुरुजनों के परम आशीष का प्रतिरूप है,इसमें मेरा कुछ भी नहीं।परमाराध्य माता-पिता की अभिव्यंजना का अभिव्यंजित स्वरूप ही प्रतिबिम्बित है," अभिव्यंजना" काव्य संग्रह।
     अभिव्यंजना को अभिव्यंजित करने में 
 हृदयावस्थित ममानुज सुलक्षित श्री लक्ष्मीकांत शर्मा एवं सुलक्षणा सुलक्षित ललिताभिराम भव्याभिलोकित भाभी परम पावन श्रीमती पवन शर्मा के अंतस् आत्मीय सहयोग की ॠणी, मैंने उनके लिए अपना हृदयांगन असीम आसमान-सा कपट कपाट रहित खुला रखा है। मैं उनके बाल वृन्द सहित सबके मंगलमयता की मंगल कामना  करती हूँ।
        हमारे केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य श्री शिव किशोर पाण्डेय एवं श्री विजय कुमार गर्ग तथा शिक्षक वृन्द और विद्यार्थीगण मेरे सहृद सुहृद  सुसमीक्षक हैं। मैं उनके प्रति आत्मीय कृतज्ञता ज्ञापित करती हूँ। उनकी निरन्तर सद्प्रेरणा के स्वरूप ही मैं " अभिव्यंजना " काव्य संग्रह  का सृजन कर सकी।
        कवि डॉ रवीन्द्र प्रसाद, शिक्षक, संस्थापक अध्यक्ष, साहित्य सृजन मंच,चतरा (झारखण्ड) का अनुपम अनुपमेय अप्रतिम एवं आत्मीय सद्  सहयोग मेरे लिए अद्वितीय दुर्लभ  संयोग सुलभ हुआ  है। हृदयान्तराल से मैं उनका हार्दिक आभार अभिव्यक्त करती हूँ।

 


 

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" अभिव्यंजना " काव्य संग्रह गुरुजनों के परम आशीष का प्रतिरूप है,इसमें मेरा कुछ भी नहीं।परमाराध्य माता-पिता की अभिव्यंजना का अभिव्यंजित स्वरूप ही प्रतिबिम्बित है," अभिव्यंजना" काव्य संग्रह।
     अभिव्यंजना को अभिव्यंजित करने में 
 हृदयावस्थित ममानुज सुलक्षित श्री लक्ष्मीकांत शर्मा एवं सुलक्षणा सुलक्षित ललिताभिराम भव्याभिलोकित भाभी परम पावन श्रीमती पवन शर्मा के अंतस् आत्मीय सहयोग की ॠणी, मैंने उनके लिए अपना हृदयांगन असीम आसमान-सा कपट कपाट रहित खुला रखा है। मैं उनके बाल वृन्द सहित सबके मंगलमयता की मंगल कामना  करती हूँ।
        हमारे केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य श्री शिव किशोर पाण्डेय एवं श्री विजय कुमार गर्ग तथा शिक्षक वृन्द और विद्यार्थीगण मेरे सहृद सुहृद  सुसमीक्षक हैं। मैं उनके प्रति आत्मीय कृतज्ञता ज्ञापित करती हूँ। उनकी निरन्तर सद्प्रेरणा के स्वरूप ही मैं " अभिव्यंजना " काव्य संग्रह  का सृजन कर सकी।
        कवि डॉ रवीन्द्र प्रसाद, शिक्षक, संस्थापक अध्यक्ष, साहित्य सृजन मंच,चतरा (झारखण्ड) का अनुपम अनुपमेय अप्रतिम एवं आत्मीय सद्  सहयोग मेरे लिए अद्वितीय दुर्लभ  संयोग सुलभ हुआ  है। हृदयान्तराल से मैं उनका हार्दिक आभार अभिव्यक्त करती हूँ।

 


 

Vaishnao Khatri , jablpur 

" अभिव्यंजना " काव्य संग्रह गुरुजनों के परम आशीष का प्रतिरूप है,इसमें मेरा कुछ भी नहीं।परमाराध्य माता-पिता की अभिव्यंजना का अभिव्यंजित स्वरूप ही प्रतिबिम्बित है," अभिव्यंजना" काव्य संग्रह।
     अभिव्यंजना को अभिव्यंजित करने में 
 हृदयावस्थित ममानुज सुलक्षित श्री लक्ष्मीकांत शर्मा एवं सुलक्षणा सुलक्षित ललिताभिराम भव्याभिलोकित भाभी परम पावन श्रीमती पवन शर्मा के अंतस् आत्मीय सहयोग की ॠणी, मैंने उनके लिए अपना हृदयांगन असीम आसमान-सा कपट कपाट रहित खुला रखा है। मैं उनके बाल वृन्द सहित सबके मंगलमयता की मंगल कामना  करती हूँ।
        हमारे केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य श्री शिव किशोर पाण्डेय एवं श्री विजय कुमार गर्ग तथा शिक्षक वृन्द और विद्यार्थीगण मेरे सहृद सुहृद  सुसमीक्षक हैं। मैं उनके प्रति आत्मीय कृतज्ञता ज्ञापित करती हूँ। उनकी निरन्तर सद्प्रेरणा के स्वरूप ही मैं " अभिव्यंजना " काव्य संग्रह  का सृजन कर सकी।
        कवि डॉ रवीन्द्र प्रसाद, शिक्षक, संस्थापक अध्यक्ष, साहित्य सृजन मंच,चतरा (झारखण्ड) का अनुपम अनुपमेय अप्रतिम एवं आत्मीय सद्  सहयोग मेरे लिए अद्वितीय दुर्लभ  संयोग सुलभ हुआ  है। हृदयान्तराल से मैं उनका हार्दिक आभार अभिव्यक्त करती हूँ।